Sunday, 26 June 2011

कैसे करूं इबादत




अगर तेरा सजदा करूं तो सर कलम मेरा कलम करना,
अगर दामन तेरा थामूं तो हाथ उखाड लेना।
मैं भी सरपस्त हूं अपनी फितरत का 

गर दुआ तुझसे मांगू तो मौत बख्श देना...

मुफलिसी ए इश्क में
मैंने इमान को भुला ​दिया,
मैं तो निकला था इबादत के लिए,
खुदा ने ही मुझे भगा दिया...

जमाना रूठ जाए
तो कोई गिला नहीं,
जब खुदा ही रूठ जाए
तो इबादत किसके लिए...



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